पर्यावरण को निर्मल और शुद्ध रखना आज समय की मांग: अरविन्द यादव

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जखनियां: पर्यावरण को निर्मल और शुद्ध रखना आज समय की मांग है, पर्यावरणविद् अरविन्द कुमार यादव ने मुडि़यारी स्थित हनुमान मंदिर पर एक गोष्ठी कर बताया कि पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए केवल सरकार की ही नहीं बल्कि आम जनमानस की भी नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिये। जिसे इसपर सभी को ध्यान देना चाहिए।आज का मशीनी इंसान अपनी नासमझ या स्वार्थ के कारण पर्यावरण संसाधनों को नष्ट करता जा रहा है। पिछले लगभग 30 वर्षों में वैज्ञानिकों ने यह समझने और समझाने की बहुत कोशिश की है कि समय और स्थान विशेष की सीमाओं में हमारे संसाधन सीमित नहीं है।अति उपयोगी सभ्यता, औद्योगिक उत्पादन, प्राकृतिक संसाधनों और ऊर्जा स्रोतों भंडारों पर आधारित है जो दोनों निश्चय ही तेजी से खत्म होते जा रहे हैं। इस प्रक्रिया में संस्थानों द्वारा ही निर्मित जीवपोशी तंत्र संकीर्ण, दूषित अथवा विषाक्त होता जा रहा है।आज विज्ञान ने हमें विकल्पों के चौराहे पर खड़ा कर दिया है।एक तो विवेक मितव्ययी और नैतिकता का लंबा रास्ता है। दूसरा भोग-विलास का जिस पर पर्यावरण तथा मानव जाति का शीघ्र ही सर्वनाश निश्चित है।इससे बचने का एक ही तरीका है कि मानव अपने नैतिक कर्तव्य को समझकर प्रकृति को समुचित सुरक्षा प्रदान करें और साथ ही उसके सीमित संसाधनों को नष्ट होने से बचाएं। इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि प्रगति को भली-भांति समझे और अपने भौतिक विकास के लिए प्रकृति से तालमेल बिठाए।तथा इसके साथ ही साथ भूमि,जल,वन, वायु इत्यादि के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगनी चाहिए ताकि पर्यावरण बच सके।सरकार की आय का बहुत बड़ा भाग जंगल है।सरकार वनों को काटने हेतु ठेके देती है। ठेकेदार जंगलों को बेरहमी से काटते है।वनों के कटने से भूमि का क्षरण, अवर्षा की स्थिति उत्पन्न होती है।अतः जंगलों की कटाई पर रोक लगाना चाहिए।वातावरण को प्रदूषित करने वाले प्रदूषकों पर तभी नियंत्रण हो सकता है जब सरकार जनसंख्या नीति के माध्यम से जनसंख्या पर रोक लगाए।गंदी बस्तियों पर रोक लगाना चाहिए तथा उचित आवास की व्यवस्था होनी चाहिए।परिवहनों द्वारा फैलाए जाने वाले धुंए से उत्पन्न वायु-प्रदूषण पर रोक लगाना।वृक्षारोपण के लिए लोंगो मे जागरूकता उत्पन्न करना।