बनते बिगड़ते समीकरणों के बीच उलझी विधानसभा जमानियां की चुनावी गणित — इस विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय लड़ाई के आसार

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जमानियां गाजीपुर।विधानसभा चुनाव की बजी चुनावी रणभेरी में चरणवार प्रत्याशियों के भाग्य ईवीएम में लॉक हो रहा है।हालांकि जिले की सात विधानसभा सीटों पर सातवें यानी 7 मार्च को अंतिम चरण का चुनाव होना है।अपनी अपनी जीत पक्की समझ सारे प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी है।इसी क्रम में जिले के गंगा पार विधानसभा जमानियां विधानसभा की सीट पर किसके सर पर सजेगा जीत का सेहरा इसका कोई स्पष्ट चेहरा साफ सामने नहीं आ रहा है।वैसे तो राष्ट्रीय और प्रांतीय पार्टियों के समर्थक अपने अपने प्रत्याशी के जीत का दावा कर रहे हैं।किंतु मतदाताओं की खामोशी क्या गुल ख़िलायेग यह तो आने वाला कल ही बताएगा।गौरतलब हो कि इस विधान सभा में दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं की भी अन्य जातियों की तुलना में अच्छी खासी भागीदारी है और इस सीट से बीएसपी ने नये और युवा चेहरे परवेज खान पर अपना भरोसा जताया है तो सत्तारूढ़ दल बीजेपी ने अपनी निवर्तमान विधायक सुनीता सिंह को ही मैदान में उतारा है तो वहीं परिवर्तन की कोई गुंजाइश नहीं कर समाजवादी पार्टी के मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पार्टी के वरिष्ठ और कद्दावर नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री व पूर्व सांसद ओमप्रकाश सिंह को ही अपने टिकट पर मैदान में डटा दिया है।इन तीन दिग्गजों ने इस विधानसभा की सीट पर लड़ाई को त्रिकोणात्मक संघर्ष में तब्दील कर दिया है वहीं जातीय वोट बैंक समीकरण और कैडर वोट के बलबूते जीत का ख्वाब देख रहे इन दिग्गजों की राह में अन्य दलों के पार्टी प्रत्याशी भी जीत की राह में रोड़ा साबित हो रहे हैं।कांग्रेस पार्टी ने भी अल्पसंख्यक महिला प्रत्याशी फरजाना शमशाद को मैदान में उतार कर बसपा प्रत्याशी के सामने एक चुनौती दे दी है।वहीं दूसरी ओर इस विधानसभा क्षेत्र के कमसार व बार क्षेत्र के मुस्लिम पठानों की एक ऐसी लॉबी भी है जो सपा प्रत्याशी ओमप्रकाश सिंह के साथ डटी है।ऐसे में बसपा के प्रत्याशी परवेज के लिए यह चुनौती से कम नहीं है।वहीं पार्टीगत जातीय समीकरण के आधार पर चुनावी वैतरणी पार करने वाले प्रत्याशियों के समक्ष भी कमोबेस यही चुनौती आड़े आ रही है।अब देखा जाये तो कभी इस विधानसभा में सपा के अध्यक्ष रहे रणजीत सिंह यादव के पुत्र रविप्रकाश यादव भी सपा की टिकट के लिए लाइन में लगे थे किंतु ऐन वक्त पर उनका टिकट कट गया जिससे क्षुब्ध होकर आम आदमी पार्टी के टिकट पर इस विधानसभा चुनाव में कूद पड़े हैं।इस अप्रत्याशित घटना क्रम को लेकर राजनीतिक गणितबाज यह कयास लगा रहे हैं कि सन 2017 के चुनाव में बिहार सरकार में पूर्व मंत्री रहे पूर्व डुमरांव विधायक ददन पहलवान के पुत्र करतार यादव ने सपा के कद्दावर नेता के जीत का समीकरण बिगाड़ दिया कहीं आप प्रत्याशी भी ऐसा कुछ कर ना बैठे।रही बात भाजपा प्रत्याशी सुनीता सिंह की तो उनके सामने भी अपनो के रूठने मनाने के साथ साथ जातीय समीकरण को साधने की चुनौती एक बड़ी समस्या नजर आ रही है।गौरतलब हो कि इस विधानसभा क्षेत्र में कुल वोटरों की संख्या 4 लाख 30 हजार के करीब है।जिसमें 2 लाख 36हजार पुरुष मतदाता और 1 लाख 94 हजार महिला मतदाता हैं।जातीय समीकरण को देखा जाये तो अल्पसंख्यक और दलित के अलावा यादव और कुशवाहा के साथ साथ अन्य जातियों की भी अच्छी खासी भागीदारी इस विधानसभा क्षेत्र में है।इस रोचक मुकाबले में देखना यह है कि खामोश मतदाता किसके बनेंगे भाग्यविधाता ये अभी भविष्य के गर्त में छुपा है।