भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले की मनाई गई जयंती

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वाराणसी।राजातालाब देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्री बाई ज्योतिबा राव फुले की 191 वीं जयंती समारोह सोमवार को राजातालाब स्थित ‘हिमाद्रि सामुदायिक शिक्षा केन्द्र’ पर मनाई गई. इस अवसर पर सावित्रीबाई फुले की तस्वीर पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. यहां मौजूद लोगों ने उनके विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया.

बालिकाओं की शिक्षा के लिए की थी विद्यालय की स्थापना

वंचित समुदाय के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने वाली स्वैच्छिक सेवा प्रदाता शिक्षिका पूजा गुप्ता ने कहा कि आज समाज में महिला को आजादी मिली है तो इसमें समाज सेविका माता सावित्रीबाई फुले का अहम योगदान है. महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखने के लिए षड्यंत्र रची गई थी ताकि वे शिक्षित होकर अपने हक और अधिकार की बात ना करने लगे. उस विपरीत परिस्थिति में माता सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षित करने के लिए संघर्ष की और बालिकाओं के लिए विद्यालय की स्थापना की थी.’ महिलाओं को शिक्षित करने के साथ समाज से कुरीतियों को मिटाने का किया काम उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले शिक्षिका के साथ मराठी की कवयित्री थीं. उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है. उन्होंने कहा कि जिस समय महिला को किसी भी समाज में शिक्षा पाने का अधिकार नहीं था. उन्होंने अपने पति से शिक्षा प्राप्त कर बालिकाओं को शिक्षा देने के लिए कई तरह की दिक्कतों को झेलते हुए, कर्तव्य पथ पर अडिग और सफल रहीं. उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले महिलाओं को शिक्षित करने के साथ-साथ समाज से कई कुरीतियों को मिटाने का काम किया. संचालन सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने किया. इस अवसर पर पूजा गुप्ता, पूनम, साधना, सुजाता, पूजा केशरी, सत्या, कोमल, नेहा, आंशिका, पीहू, तृषा, आदित्य, बाबू, रूकमनी देवी, गुड़िया, सीता, हिमाद्रि, राजकुमार गुप्ता सहित कई लोग उपस्थित थे।