मां सरस्वती की जीती जागती प्रति मूर्ति नहीं रही : रजनीकांत

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प्रयागराज।भारतीय जनता पार्टी एनजीओ प्रकोष्ठ के सहसंयोजक रजनीकांत ने कहा कि आज हम सबके बीच से मां सरस्वती की जीती जागती प्रति मूर्ति नहीं रही आपकी प्रतिभा और ज्ञान से सारा विश्व परिचित है आप साक्षात कोकिला स्वरूपा थी लता जी का शरीर शांत हो गया हो गया। कल सरस्वती पूजा थी, आज माँ विदा हो रही हैं। लगता है जैसे माँ सरस्वती इस बार अपनी सबसे प्रिय पुत्री को ले जाने ही स्वयं आयी थीं।मृत्यु सदैव शोक का विषय नहीं होती।मृत्यु जीवन की पूर्णता है। लता जी का जीवन जितना सुन्दर रहा है, उनकी मृत्यु भी उतनी ही सुन्दर हुई है।93 वर्ष का इतना सुन्दर और धार्मिक जीवन विरलों को ही प्राप्त होता है।लगभग पाँच पीढ़ियों ने उन्हें मंत्रमुग्ध हो कर सुना है, और हृदय से सम्मान दिया है।उनके पिता ने जब अपने अंतिम समय में घर की बागडोर उनके हाथों में थमाई थी तब उस तेरह वर्ष की नन्ही जान के कंधे पर छोटे छोटे चार बहन-भाइयों के पालन की जिम्मेवारी थी। लता जी ने अपना समस्त जीवन उन चारों को ही समर्पित कर दियाऔर आज जब वे गयी हैं तो उनका परिवार भारत के सबसे सम्मानित प्रतिष्ठित परिवारों में से एक है। किसी भी व्यक्ति का जीवन इससे अधिक सफल क्या होगा लोगों को प्रेरणा देकर गई जीवन में संघर्ष करें और लक्ष्य को भी प्राप्त करें कुछ भी असंभव नहीं है आपने वह करके दिखाया भारत पिछले अस्सी वर्षों से लता जी के गीतों के साथ जी रहा है। हर्ष में विषाद मेंईश्वर भक्ति में राष्ट्र भक्ति में,प्रेम में,परिहास में… हर भाव में लता जी का स्वर हमारा स्वर बना है।
लता जी गाना गाते समय चप्पल नहीं पहनती थीं। गाना उनके लिए ईश्वर की पूजा करने जैसा ही था। मां सरस्वती के प्रति आपका सम्मान हमेशा दिखाई पड़ता था कोई उनके घर जाता तो उसे अपने माता-पिता की तस्वीर और घर में बना अपने आराध्य का मन्दिर दिखातीं थीं। बस इन्ही तीन चीजों को विश्व को दिखाने लायक समझा था उन्होंने। सोच कर देखिये, कैसा दार्शनिक भाव है यह… इन तीन के अतिरिक्त सचमुच और कुछ महत्वपूर्ण नहीं होता संसार में। सब आते-जाते रहने वाली चीजें हैं।कितना अद्भुत संयोग है कि अपने लगभग सत्तर वर्ष के गायन कैरियर में लगभग 36भाषाओं में हर रस/भाव के 50 हजार से भी अधिक गीत गाने वाली लता जी ने अपना पहले और अंतिम हिन्दी फिल्मी गीत के रूप में भगवान भजन ही गाया है। ‘ज्योति कलश छलके’ से ‘दाता सुन ले’ तक कि यात्रा का सौंदर्य यही है कि लताजी न कभी अपने कर्तव्य से डिगीं न अपने धर्म से! इस महान यात्रा के पूर्ण होने पर हमारा रोम रोम आपको प्रणाम करता है लता जी ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो आंसू गीत आज भी मन को द्रवित कर देता है आज आपको पूरा राष्ट्र श्रद्धांजलि दे रहा है मेरी तरफ से भी आपको विनम्र श्रद्धांजलि शोक व्यक्त करने वालों में रजनीकांत बृजेश श्रीवास्तव रवि शर्मा विपुल कुमार अनूप कुमार ज्ञानेंद्र द्विवेदी अवनीश श्रीवास्तव सुशील पांडे आदि रहे।