यू-ट्यूबर्स बने जी का जंजाल

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 *डॉ. निशिकांत के ट्विट  से आया भूचाल*

, *उठी आवाज केन्द्र सरकार लगाये यू-ट्यूबर्स पर लगाम*

, *पत्रकारों ने सांसद के ट्विट को सराहा*

*जनबिन्दु समाचार न्यूज*
*नई दिल्ली*, यू-ट्यूबरों ने पत्रकारिता जगत पर ही प्रश्न-चिह्न लगा दिया है, कौन सी बात सही है या कौन सी बात गलत, आप इन यू-ट्यूबरों के चक्कर में कन्फ्यूज्ड हो जायेंगे और जब सही-गलत का पता चलेगा, तब तक आपका नुकसान हो चुका होगा, यानी आप भी इन यू-ट्यूबरों के चक्कर में फंसकर गंध फैला चुके होंगे।
ज्यादातर यू-ट्यूबरों को पता ही नहीं कि पत्रकारिता क्या होती हैं? न तो $इनको भाषा की जानकारी होती हैं और न ही सही-गलत के पहचान का, जो मन में आता है, ये बक देते हैं और सामान्य जनों के मन-मस्तिष्क को प्रभावित कर चुके होते हैं। यहीं नहीं, $ये यू-ट्यूबर लोगों को विजुअल के माध्यम से ब्लैकमेलिंग भी करते हैं। कई जगहों पर देखा गया कि ऐसे यू-ट्यूबरों को उनके इन कुकृत्यों पर आम जनता कही-कही ठगी सी रह जाती है।कुछ पत्रकार बताते है कि जब अखबारों व चैनलों के लिए कानून बन सकते हैं तो इन यू-ट्यूबरों के लिए कानून क्यों नहीं? आप मोबाइल ले लिए, दस रुपये का बूम ले लिये, अपने यू-टयूब से जुड़े चैनल का अल-बल नाम लिख लिये और चल दिये किसी के भी आंगन में तांक-झांक करने, वो भी बेरोक-टोक, अगर किसी ने आपको यह कह दिया कि मैंने तो आपको बुलाया नहीं, तो लगे ताव देने, कि मैं पत्रकार हूं, अरे भाई आपको पत्रकार का तमगा किसने दे दिया।ऐसे में तो सभी के पास मोबाइल हैं तो क्या सभी पत्रकार हो गये। केन्द्र सरकार को तो इस पर कानून लाना ही चाहिए। इस मामले में सांसद डा. निशिकांत दूबे की इस पहल को जो योग्य पत्रकार हैं या सही मायनों में पत्रकार हित के लिए जो समर्पित संगठन हैं, उन्होंने भी इस पहल के लिए डा. निशिकांत दूबे को बधाई दी है, साथ ही केन्द्र सरकार से इस पर जल्द ही ठोस निर्णय लेने की अपील कर डाली है।