विद्यार्थियों को आप्टिकल फाइवर की उत्पत्ति एवं इसके उपयोग से रूबरू कराया

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मरदह गाजीपुर।क्षेत्र के कुंवर इंटर कॉलेज नरवर के परिसर में श्री ब्रह्मजी शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति के नेतृत्व में चल रहे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रायोजित विज्ञान जागरूकता मेले के दूसरे दिन गुरुवार को।कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित के साथ शुभारंभ हुआ।मुख्य अतिथि प्रोफेसर डा.पी. सी.पाण्डेय बी.एच.यू. ने व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को आप्टिकल फाइवर की उत्पत्ति एवं इसके उपयोग से रूबरू करते हुए कहा कि फाइबर – ऑप्टिक संचारण एक प्रणाली है जिसमें सूचनाओं की जानकारी एक स्थान से दूसरे स्थान में ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से प्रकाश बिन्दुओं के रूप में भेजी जाती हैं। प्रकाश एक विद्युत चुम्बकीय तरंग वाहक विकसित करता है जो विधिवत् रूप से जानकारी को साथ ले जाते हैं। 1970 के दशक में इसे सबसे पहले विकसित किया गया, फाइबर-ऑप्टिक संचार प्रणाली ने दूरसंचार उद्योग में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है और सूचना युग के आगमन में एक प्रमुख भूमिका निभाई है।डा.चन्दन उपाध्याय प्रोफेसर बी.एच.यू.ने एन्टीबैटीक दवाओं की खोज एवं इसके उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एंटीबायोटिक्स का उपयोग कुछ तरह के जीवाणु/ बैक्टीरिया संक्रमण के इलाज या रोकथाम के लिए किया जाता है। वे बैक्टीरिया को मारने या उनके प्रजनन करने और फैलने को रोकने का काम करते हैं।लेकिन ये हर चीज के लिए उपयोगी नहीं होते हैं। जब एंटीबायोटिक दवाओं की बात आती है,तो अपने डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।डा. वी. पी. दुबे नवोदय विद्यालय गाजीपुर द्वारा विज्ञान के क्षेत्र में सौर ऊर्जा एवं इसके उपयोग पर प्रकाश डालते हुए मोबाइल के अविष्कार एवं विभिन्न पीढ़ीओं में परिवर्तन के बारे में बताया तथा सौर ऊर्जा ऊर्जा है जो सीधे सूर्य से प्राप्त की जाती है । यहीं धरती पर सभी प्रकार के जीवन (पेड़-पौधे और जीव-जन्तु) का सहारा है। वैसे तो सौर उर्जा को विविध प्रकार से प्रयोग किया जाता है, किन्तु सूर्य की ऊर्जा को विद्युत उर्जा में बदलने को ही मुख्य रूप से सौर उर्जा के रूप में जाना जाता है। सूर्य की ऊर्जा को दो प्रकार से विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है। पहला प्रकाश-विद्युत सेल की सहायता से उष्मा से गर्म करने के बाद इससे विद्युत जनित्र चलाकर सौर ऊर्जा सबसे अच्छा ऊर्जा है। यह भविष्य में उपयोग करने वाली ऊर्जा है।अंत में प्रतिभागियों को कार्यक्रम के महत्व से अवगत कराया उनकी विज्ञान परियोजनाओं का समन्वय किया तथा उनका फीडबैक प्राप्त किया।इस अवसर पर कोवार्डिनेटर संजय कुमार चतुर्वेदी,प्रेमचंद सिंह,श्यामदेव यादव, सीताराम यादव,विजयशंकर सिंह,जयप्रकाश सिंह, अनिकेत साहनी मौजूद रहे।