शिक्षक होना गर्व की बात,आज शिक्षकों का दायित्व सबसे बड़ा

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गाजीपुर।नगर के लूर्द्स कान्वेन्ट इंटर कॉलेज में साहित्यिक सांस्कृतिक सामाजिक संस्था शारदा ज्योति समाज की रजत जयन्ती का आयोजन सम्पन्न हुआ।इसका शुभारम्भ मुख्य अतिथि,अध्यक्ष,विशिष्ट अतिथियों द्वारा माता सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।लूर्द्स कान्वेन्ट की बालिकाओं द्वारा ईश्वर वंदन करते हुए शास्त्रीय नृत्य तथा मार्टर मेमोरियल स्कूल जंगीपुर के छात्रों द्वारा महादेव के अघोर रूप का आधुनिक नृत्य द्वारा प्रस्तुतिकरण किया गया।लूर्द्स की छात्राओं ने सभी अतिथियों का स्वागत संगीतबद्ध गायन से किया।इस अवसर पर शारदा ज्योति समाज ने विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए सिस्टर अल्फोन्सा, माधव कृष्ण,निर्मला कश्यप,तारिक,डॉ शिखा तिवारी, मोहम्मद खालिद अमीर,डॉ व्यासमुनी राय, ज्ञानप्रकाश,डॉ शिवकुमार,संतन कुमार राम व गोपाल जीवराजिका को रजत जयंती “दीपान्जू शारदा किरण रत्न” सम्मान प्रदान किया।निरंतर अच्छा परिणाम देने और बच्चों की निहित प्रतिभा को उजागर करने के लिए अष्टभुजी कॉलोनी स्थित द प्रेसिदियम इंटरनेशनल स्कूल और अन्धऊ स्थित एन एन गुरुकुल को रजत जयन्ती ‘प्रगतिशील उत्कृष्ट विद्यालय सम्मान’ प्रदान किया गया।कोरोना में सेवाकार्य के लिए चित्रगुप्त वंशीय सभा को उत्कृष्ट सामाजिक कार्य सम्मान दिया गया।संस्था ने शिक्षा के क्षेत्र में अवदान के लिए चार अध्यापिकाओं को २०२२ का गुरु ज्योति सम्मान प्रदान किया सुश्री पूजा राय,श्रीमती अनीशा सिंह,सुश्री सुरभि श्रीवास्तव,सुश्री अनुश्री उच्च शिक्षा और अनुशासन के क्षेत्र में योगदान के लिए जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के भूतपूर्व कुलपति व काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.हरिकेश सिंह जी को कुलवंत शारदा ज्योति रत्न सम्मान प्रदान किया गया। संस्था द्वारा पूरे वर्ष आयोजित विभिन्न अंतर-विद्यालयी प्रतियोगिताओं में विजेता प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और मैडल देकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.हरिकेश सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि शारदा ज्योति समाज एक अ-सरकारी संस्था होकर भी विगत पच्चीस वर्षों से असरकारी कार्य कर रही है। स्वतंत्रता के पूर्व शिक्षण संस्थाओं को छोड़कर सड़कों पर कार्य होते थे जिनमें युवाओं की भागीदारी से देश आजाद हुआ। अब सड़कों से बच्चों और युवाओं को खींचकर शिक्षण संस्थाओं में शिक्षित करने का कार्य करना होगा क्योंकि राष्ट्र का निर्माण कक्षाओं में होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षा लूर्द्स कान्वेन्ट की प्रधानाचार्या सिस्टर अल्फोन्सा ने कहा कि राष्ट्र किसी की सम्पत्ति नहीं।शिक्षण संस्थाओं और शारदा ज्योति समाज जैसी संस्थाओं को जाति और धर्म से ऊपर उठकर एक राष्ट्र के लिए कार्य करना होगा।एक शिक्षक होना गर्व की बात है और इसलिए आज शिक्षकों का दायित्व सबसे बड़ा है।विविध क्षेत्रों के लोगों और छात्र-छात्राओं का सम्मान करने से समाज में एक सकारात्मक सन्देश जाता है।सम्मानित अतिथियों में से मोहम्मद खालिद अमीर और डॉ व्यासमुनी राय ने भी अपने विचार अभिव्यक्त किये और शिक्षकों तथा छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन किया। सभी लोगों ने संस्था में अनवरत कार्य कर रहे सचिव दिनेश्वर दयाल श्रीवास्तव जी की निष्ठा और समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की।समारोह के अंत में संस्था के सचिव दिनेश्वर जी ने सभी आगंतुकों,अतिथियों,विद्यालयों, विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।लूर्द्स कान्वेन्ट की एन सी सी कैडेट्स और स्काउट गाइड की टीम के एक-एक सदस्य को पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था संभालने के लिए प्रमाणपत्र और मैडल दिया गया। कार्यक्रम का संचालन करने वाली चारों छात्राओं को सम्मान देने के बाद, राष्ट्रगान के साथ दीपान्जू महोत्सव-२०२२ का समापन हुआ।