25 वर्ष की आयु में संन्यास लेकर स्वामी विवेकानंद ने दुनिया को सिखाई जीवन जीने की कला

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जखनियां गाजीपुर।स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में पूरे देशभर में मनायी जा रही है।आज कै दिन स्कूल कालेजों में निबन्ध,वाद-विवाद प्रतियोगिता जैसे तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जाते है।इस बार शीतलहर की छुट्टियों की वजह से विभिन्न संगठनों के लोग जगह जगह गोष्ठी का आयोजन कर स्वामी की जयन्ती मनाये।इसी कडी़ में रुलर डेवलपमेंट एण्ड रिसर्च फाउंडेशन संस्था ने जखनिया ब्लाक स्थित हनुमान मंदिर पर गोष्ठी का आयोजन कर उनके जीवन पर प्रकाश डाला।गोष्ठी के आयोजन मे मुख्य वक्ता एवं संस्था निदेशक अरविन्द कुमार यादव ने कहा कि यह दिन देश के उन युवाओं को समर्पित किया जाता है, जो भारत के लिए एक स्वस्थ और बेहतर भविष्य को आकार देने की क्षमता रखते हैं। स्वामी विवेकानंद का युवाओं से गहरा नाता था, इसलिए उनके जन्‍म दिवस को युवाओं के लिए समर्पित किया गया है।इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस भी कहा जाता है।स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था।इनका असली नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था।वे वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। 25 साल की उम्र में विवेकानंद ने सांसारिक मोह माया त्याग दी थी और संन्यासी बन गए।संस्था सचिव उदय प्रताप यादव ने भी उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1881 में विवेकानंद की मुलाकात रामकृष्ण परमहंस से हुई।जिसके बाद वे पूरे विश्‍व में दार्शनिक और विचारक के तौर पर लोगों को प्रेरित करने लगे।विवेकानंद को धर्म,दर्शन,इतिहास,कला, सामाजिक विज्ञान,साहित्य का ज्ञान था।शिक्षा में निपुण होने के साथ-साथ वे भारतीय शास्त्रीय संगीत का भी ज्ञान रखते थे। उनके जन्मदिन के दिन राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने का मुख्य लक्ष्य भारत के युवाओं के बीच स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और विचारों के महत्व का प्रसार करना है. स्वामी विवेकानंद एक महान समाज सुधारक,दार्शनिक और विचारक थे।वह देश भर के सभी युवाओं के लिए प्रेरणा थे।उनकी शिक्षा एवं आदर्शों को भारतीय युवाओं के लिए रोल मॉडल के रूप में पेश किया जाता है।इस मौकै पर डा.संजय यादव,विनोद एडवोकेट,प्रिंस गुप्ता,चंदन यादव सहित अनेक समाजसेवी मौजूद रहे।